
देहरादून: उत्तराखंड में लगभग 19 लाख मतदाताओं का मतदान अधिकार खतरे में पड़ गया है। चुनाव आयोग के बार-बार निर्देशों के बावजूद इन मतदाताओं की बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मैपिंग अब तक पूरी नहीं हो पाई है। यदि निर्धारित समय सीमा तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो इनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की कार्रवाई हो सकती है।
राज्य में कुल 84.42 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से अब तक 64.63 लाख मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग पूरी हो चुकी है, जो लगभग 76 प्रतिशत है। वहीं करीब 19.79 लाख मतदाता अभी भी सत्यापन प्रक्रिया से बाहर हैं।
घर-घर चल रहा सत्यापन अभियान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं। जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी नहीं हो पाएगी, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा।
यदि तय समय के भीतर संबंधित मतदाता संतोषजनक जवाब या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते, तो उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
जिलों में अलग-अलग स्थिति
बीएलओ मैपिंग को लेकर जिलों में स्थिति समान नहीं है।
हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे बड़े जिलों में सबसे अधिक मतदाता अब भी सत्यापन से बाहर हैं।
जबकि पर्वतीय जिलों में मैपिंग की प्रगति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है।
मतदाताओं से की गई अपील
चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे:
1 अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क करें
2 आवश्यक फॉर्म भरें
3 पहचान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराएं
ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित बना रहे।
अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और इसका उद्देश्य केवल फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करना है — न कि किसी वास्तविक मतदाता को उसके अधिकार से वंचित करना।











