

त्योहारी सीजन में भारी डिस्काउंट, कैशबैक और फ्री गिफ्ट के नाम पर हो रही साइबर ठगी; फर्जी वेबसाइट से लेकर QR कोड तक को बनाया जा रहा हथियार, जानिए कैसे बचाएं अपनी मेहनत की कमाई
नई दिल्ली। दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म तक खरीदारी की रौनक बढ़ने लगी है। ग्राहकों को लुभाने के लिए कंपनियां आकर्षक डिस्काउंट, कैशबैक, फ्री गिफ्ट और विशेष फेस्टिव ऑफर पेश कर रही हैं। लेकिन इस त्योहारी चमक-दमक के बीच साइबर अपराधियों ने भी ठगी का जाल बिछाना शुरू कर दिया है। सस्ते सामान का लालच, शानदार ऑफर और इनाम जीतने के मैसेज अब साइबर ठगों के नए हथियार बनते जा रहे हैं।
साइबर अपराधी नामी कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन, नकली पेमेंट लिंक और QR कोड के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई बार लोग भारी छूट के लालच में बिना जांच-पड़ताल के पेमेंट कर देते हैं और कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से रकम गायब हो जाती है। ऐसे में दिवाली की खरीदारी करते समय थोड़ी सी लापरवाही आपकी सालभर की मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकती है। आइए जानते हैं साइबर ठगी के पांच बड़े तरीके और उनसे बचने के उपाय।
1. फर्जी शॉपिंग वेबसाइट: भारी डिस्काउंट का लालच देकर लगाते हैं चूना
दिवाली के दौरान साइबर ठग नामी ई-कॉमर्स कंपनियों की हूबहू नकल करने वाली वेबसाइट तैयार कर लेते हैं। इन वेबसाइट पर स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और अन्य महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है। 70 से 80 प्रतिशत तक छूट देखकर ग्राहक बिना वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचे ऑर्डर बुक कर देते हैं। पेमेंट करने के बाद न तो सामान पहुंचता है और न ही रकम वापस मिलती है। कई मामलों में नकली या घटिया उत्पाद भेजकर भी ग्राहकों को ठगा जाता है। इसलिए खरीदारी हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही करें।
2. सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए ठगी: एक क्लिक में चोरी हो सकती है जानकारी
फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिवाली ऑफर्स के नाम पर आकर्षक विज्ञापन दिखाए जाते हैं। इनमें ब्रांडेड सामान बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है। इन विज्ञापनों पर क्लिक करते ही ग्राहक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं, जहां उनसे नाम, मोबाइल नंबर, बैंकिंग डिटेल्स और पेमेंट संबंधी जानकारी मांगी जाती है। इस तरह साइबर अपराधी आपकी निजी और वित्तीय जानकारी हासिल कर सकते हैं। किसी भी विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑफर की पुष्टि जरूर करें।
3. QR कोड और UPI के नाम पर ठगी: पैसा पाने के चक्कर में गंवा सकते हैं रकम
डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर ठग QR कोड और UPI को भी हथियार बना रहे हैं। दिवाली पर कैशबैक, इनाम और गिफ्ट देने के नाम पर लोगों को QR कोड भेजे जाते हैं। इसके बाद रकम प्राप्त करने के बहाने QR कोड स्कैन करने और UPI PIN डालने के लिए कहा जाता है। ऐसा करते ही आपके खाते से पैसे निकल सकते हैं। याद रखें, किसी से पैसे प्राप्त करने के लिए QR कोड स्कैन करने या UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। अपना UPI PIN और OTP किसी के साथ साझा न करें।
4. फेक डिलीवरी और रिफंड स्कैम: पार्सल अटकने का मैसेज बन सकता है मुसीबत
ऑनलाइन खरीदारी के दौरान साइबर ठग फर्जी SMS या व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर बताते हैं कि आपका पार्सल किसी कारण से रोक दिया गया है या ऑर्डर रद्द हो गया है। इसके बाद डिलीवरी दोबारा शुरू कराने अथवा रिफंड पाने के नाम पर एक लिंक भेजा जाता है। जैसे ही ग्राहक उस लिंक पर क्लिक करके अपनी बैंकिंग जानकारी या अन्य निजी विवरण भरता है, ठग उसका फायदा उठा सकते हैं। इसलिए पार्सल की स्थिति, ऑर्डर और रिफंड से जुड़ी जानकारी केवल संबंधित कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर ही जांचें।
5. फ्री गिफ्ट और कैशबैक का लालच: इनाम के नाम पर खाली कर रहे खाते
त्योहारी सीजन में फ्री गिफ्ट, शॉपिंग बोनस और आकर्षक कैशबैक के नाम पर भी ठगी के मामले सामने आ सकते हैं। साइबर अपराधी लोगों को मैसेज भेजकर बताते हैं कि उन्होंने कोई बड़ा इनाम जीत लिया है या उनके लिए विशेष कैशबैक उपलब्ध है। इनाम पाने के लिए फर्जी लिंक खोलने, ऑनलाइन फॉर्म भरने या प्रोसेसिंग फीस जमा करने को कहा जाता है। कई बार इसी बहाने OTP और बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर ली जाती है। ऐसे किसी भी अनजान ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।
दिवाली की खरीदारी में इन 7 बातों का रखें विशेष ध्यान
- अनजान वेबसाइट और संदिग्ध लिंक के जरिए ऑनलाइन खरीदारी करने से बचें।
- किसी भी डिस्काउंट या कैशबैक ऑफर की पुष्टि कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से करें।
- अपना OTP, UPI PIN और बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- पैसे प्राप्त करने के नाम पर भेजे गए QR कोड को स्कैन न करें।
- पार्सल, डिलीवरी और रिफंड की जानकारी आधिकारिक ऐप से ही जांचें।
- बहुत ज्यादा छूट और फ्री गिफ्ट के लालच में जल्दबाजी न करें।
- ऑनलाइन पेमेंट करने से पहले वेबसाइट और भुगतान की जानकारी अच्छी तरह जांच लें।
ठगी होने पर तुरंत उठाएं ये कदम
अगर आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, रकम को रोकने या आगे के नुकसान को सीमित करने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
त्योहार खुशियों का है, ठगी का नहीं! दिवाली पर खरीदारी करते समय ऑफर्स की चमक में अपनी सतर्कता को कमजोर न पड़ने दें। याद रखें, साइबर ठग अक्सर वहीं कामयाब होते हैं जहां लोग बिना सोचे-समझे किसी लिंक पर क्लिक कर देते हैं। थोड़ी सी सावधानी आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है और आपकी दिवाली को खुशहाल बना सकती है।











