उत्तराखंड में अब हर परिवार की बनेगी डिजिटल पहचान, CM धामी ने लॉन्च किया ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’; जानिए किसे मिलेगी आईडी और क्या होंगे फायदे?

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15 साल से प्रदेश में रह रहे नागरिक भी करा सकेंगे पंजीकरण, परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला होगी मुखिया; डेटा में सेंधमारी करने पर 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान

देहरादून। उत्तराखंड में रहने वाले परिवारों के लिए एक बड़ी और अहम खबर है। प्रदेश की धामी सरकार ने सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ कर दिया। इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक परिवार का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब राज्य में रहने वाले परिवारों को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान यानी ‘देवभूमि परिवार आईडी’ दी जाएगी।

इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसका लाभ केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पिछले 15 वर्षों से प्रदेश में निवास कर रहे नागरिकों के परिवार भी इसके दायरे में शामिल हो सकेंगे। सरकार का उद्देश्य प्रत्येक परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

क्या है देवभूमि परिवार आईडी और कैसे करेगी काम?

देवभूमि परिवार आईडी के तहत प्रदेश के प्रत्येक परिवार को एक अलग और विशिष्ट पहचान संख्या जारी की जाएगी। इस आईडी से परिवार के सभी सदस्यों का विवरण जोड़ा जाएगा। इसमें परिवार के सदस्यों के नाम, आयु, आधार से संबंधित जानकारी, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विवरण शामिल होंगे।

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इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए नागरिकों को बार-बार अलग-अलग विभागों में अपनी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने की परेशानी से राहत मिल सकती है। विभिन्न सरकारी विभाग एकीकृत डेटाबेस के माध्यम से परिवार की पात्रता और पहले से मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

15 साल से उत्तराखंड में रह रहे परिवारों को भी मिलेगा मौका

देवभूमि परिवार आईडी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी पात्रता है। इस योजना में केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों को ही शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि ऐसे परिवार भी पंजीकरण करा सकेंगे, जो पिछले 15 वर्षों से लगातार प्रदेश में रह रहे हैं।

इससे लंबे समय से उत्तराखंड में निवास कर रहे नागरिकों का भी सरकारी रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तैयार हो सकेगा। हालांकि, पंजीकरण के लिए निर्धारित पात्रता और सत्यापन संबंधी नियमों का पालन करना होगा।

फर्जी लाभार्थियों पर लगेगी लगाम, योजनाओं का होगा बेहतर सत्यापन

अभी तक अलग-अलग सरकारी विभाग अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस तैयार करते हैं। कई बार एक ही व्यक्ति का विवरण अलग-अलग विभागों में दर्ज होने, दोहरे लाभ और पात्रता के सत्यापन में देरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

देवभूमि परिवार आईडी के माध्यम से इन सभी जानकारियों को एकीकृत किया जाएगा। इससे सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि किस परिवार को किन सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और वह किन अन्य योजनाओं के लिए पात्र है। इससे फर्जी और अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने के साथ सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला होगी मुखिया

देवभूमि परिवार आईडी की व्यवस्था में महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे वरिष्ठ महिला को परिवार का मुखिया माना जाएगा। यानी परिवार की डिजिटल पहचान महिला मुखिया के नाम से जुड़ी होगी।

यह प्रावधान परिवार की पहचान व्यवस्था में महिलाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डेटा चोरी करने वालों की खैर नहीं, 10 साल जेल और 50 लाख जुर्माना

देवभूमि परिवार आईडी के माध्यम से तैयार होने वाले डेटाबेस में नागरिकों की कई महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और सामाजिक-आर्थिक जानकारियां दर्ज रहेंगी। ऐसे में डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर भी अधिनियम में सख्त प्रावधान किए गए हैं।

कानून के अनुसार, डेटाबेस में अनधिकृत तरीके से सेंधमारी करने अथवा अवैध रूप से डेटा तक पहुंच बनाने के दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा को भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया है।

विधानसभा से पारित होकर कानून बना देवभूमि परिवार अधिनियम 2026

देवभूमि परिवार आईडी की व्यवस्था को कानूनी आधार देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर देवभूमि परिवार अधिनियम 2026 विधानसभा में पेश किया गया था। विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया। तत्कालीन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की स्वीकृति मिलने के बाद यह अधिनियम लागू हुआ। अब मुख्यमंत्री धामी द्वारा पोर्टल का शुभारंभ किए जाने के साथ ही इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने की शुरुआत हो गई है।

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सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में आएगी पारदर्शिता

सरकार को उम्मीद है कि देवभूमि परिवार आईडी लागू होने से सरकारी योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता आएगी और पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना आसान होगा। वहीं, नागरिकों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से भी राहत मिल सकती है।

हालांकि, इस पूरी व्यवस्था की सफलता केवल डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं होगी। नागरिकों की निजी जानकारी कितनी सुरक्षित रखी जाती है, डेटा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता है और पात्र परिवारों को इसका लाभ कितनी आसानी से मिलता है, यह भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, देवभूमि परिवार आईडी उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं के वितरण और परिवारों के डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब देखना होगा कि यह नई व्यवस्था आम जनता के लिए कितनी सरल, पारदर्शी और प्रभावी साबित होती है।

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