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झूठ बोलकर घर से निकला युवक, प्रयागराज में बना संन्यासी; मां सामने आई तो पहचानने से किया इनकार, जाने पूरा मामला…

उत्तर प्रदेश के रायबरेली से एक ऐसी चौंकाने वाली और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां रहने वाला 22 वर्षीय युवक अमर कमल रस्तोगी अचानक घर छोड़कर प्रयागराज पहुंच गया और माघ मेले में संन्यास का रास्ता अपना लिया।

चर्च जाने की बात कहकर निकला था घर से परिजनों के अनुसार अमर 1 जनवरी को नए साल के दिन यह कहकर घर से निकला था कि वह लखनऊ के एक चर्च जा रहा है और शाम तक लौट आएगा, लेकिन देर रात तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिवार की चिंता बढ़ गई। मोबाइल भी लगातार स्विच ऑफ आने लगा। पिता नवीन कमल रस्तोगी और पूरा परिवार परेशान हो गया, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि उनका बेटा दुनिया-जहान छोड़ने का फैसला कर चुका है।

व्हाट्सएप स्टेटस से सामने आई सच्चाई

लापता होने के तीन दिन बाद अचानक अमर के मोबाइल पर एक व्हाट्सएप स्टेटस दिखा, जिसने सबको हैरान कर दिया। स्टेटस में वह प्रयागराज के माघ मेले में भगवा वस्त्रों में नजर आया। परिवार को पता चला कि अमर ने संन्यास धारण कर लिया है। यह देखते ही मां सोनी रस्तोगी और उसकी बहनें तुरंत प्रयागराज के लिए रवाना हो गईं।

मां को देखकर भी नहीं पिघला दिल

माघ मेले के शिविर में जब मां ने अपने जवान बेटे को साधु के वेश में देखा तो वह फूट-फूट कर रो पड़ीं। सबसे दर्दनाक पल तब आया, जब अमर ने शुरुआत में अपनी सगी मां को पहचानने से भी इनकार कर दिया। हालांकि मां की ममता भरी पुकार पर उसने उन्हें गले तो लगाया, लेकिन घर लौटने से साफ मना कर दिया।

गुरु की शरण में गया अमर

अमर कमल रस्तोगी ने स्वामी गोपाल दास को अपना गुरु मानकर दीक्षा ले ली है। उसका कहना है कि अब उसका जीवन ईश्वर की भक्ति और संतों की सेवा में ही समर्पित रहेगा। उसने परिवार की हर गुहार को ठुकराते हुए सांसारिक जीवन में लौटने से इनकार कर दिया।

सदमे में परिवार

बेटे के इस फैसले से पूरा परिवार टूट चुका है। पिता नवीन कमल रस्तोगी अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनका बेटा एक दिन जरूर वापस लौटेगा, जबकि मां सोनी रस्तोगी भारी मन से घर लौट आई हैं और बस अपने बेटे की वापसी के लिए दुआ कर रही हैं।

प्रयागराज के माघ मेले और कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां युवा आध्यात्मिक जीवन से प्रभावित होकर सब कुछ छोड़ देते हैं। अमर कमल की कहानी भी अब उसी कड़ी में जुड़ गई है — जहां आस्था और परिवार के बीच भावनाओं की गहरी लड़ाई देखने को मिल रही है।

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