
देहरादून/रुड़की। में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद उसका पहला बड़ा कानूनी असर सामने आया है। रुड़की में तीन तलाक और हलाला से जुड़े मामले में पुलिस ने पहली बार यूसीसी के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। इसे देश में हलाला से संबंधित पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जिसमें यूसीसी के तहत सीधे आपराधिक कार्रवाई की गई है।
मामला के बुग्गावाला थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाली एक युवती की शादी दो वर्ष पहले मोहम्मद दानिश निवासी मजाहिदपुर सतीवाला से हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज को लेकर महिला का उत्पीड़न किया जाने लगा। पीड़िता के अनुसार उसे कमरे में बंद कर पीटा गया और बाद में पति ने तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया।
करीब 15 दिन मायके में रहने के बाद जब महिला ने पति से दोबारा साथ रखने की बात कही तो उस पर हलाला करने का दबाव बनाया गया। पीड़िता का आरोप है कि पति ने कहा कि “जहां कहा जाए, वहां हलाला करना पड़ेगा।”
इसके बाद चार अप्रैल 2026 को महिला ने पति मोहम्मद दानिश, ससुर सईद, जेठ मोहम्मद अरसद, देवर परवेज और जावेद, सास गुलशाना, ननद सलमा और ननदोई फैजान समेत आठ लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और तीन तलाक का मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के दौरान देहरादून के टर्नर रोड निवासी रहमान का नाम भी सामने आने के बाद आरोपितों की संख्या बढ़कर नौ हो गई।
जांच में खुली हलाला की परत
शुरुआती मुकदमे में हलाला से संबंधित धाराएं शामिल नहीं थीं, जिस पर पीड़िता और उसके परिवार ने नाराजगी जताई थी। मामले की जांच कर रहे उप निरीक्षक मनोज कुमार ने पीड़िता और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में महिला पर हलाला के लिए दबाव बनाए जाने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने यूसीसी एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ दीं।
ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है।
यूसीसी में क्या है प्रावधान
यूसीसी एक्ट में पुनर्विवाह के लिए किसी भी प्रकार की शर्त को दंडनीय माना गया है। धारा 32(1)(2) और 32(1)(3) के तहत ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
हालांकि एक्ट में “हलाला” शब्द का सीधे उल्लेख नहीं है, लेकिन धारा-30 की उपधारा-2 में स्पष्ट किया गया है कि विवाह-विच्छेदित पति-पत्नी का पुनर्विवाह बिना किसी शर्त के अनुमन्य होगा। पुनर्विवाह से पहले किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करने जैसी शर्त को गैरकानूनी माना गया है।
शासकीय अधिवक्ता जीपी रतूड़ी के अनुसार, यूसीसी के तहत हलाला से जुड़ा यह देश का पहला मामला है। इस अपराध में तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम: फरजाना बेगम
ने कहा कि वह पीड़िता से मुलाकात कर उसे हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएंगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक महिलाएं हलाला जैसे मामलों पर खुलकर सामने नहीं आ पाती थीं, लेकिन यूसीसी लागू होने के बाद उनमें भरोसा बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा यूसीसी लागू करना महिलाओं के हित में बड़ा कदम है। अब पीड़ित महिलाएं साहस के साथ न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं।
“इतिहास में दर्ज होगा यह मामला”
सामाजिक कार्यकर्ता एवं यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य ने कहा कि हलाला जैसी कुप्रथा महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि शाहबानो और शायरा बानो की तरह यह मामला भी इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा और मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक व हलाला जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी होगी।










