
देहरादून। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे युवा आंदोलन की गूंज अब उत्तराखंड में भी सुनाई देने लगी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आंदोलन के समर्थन में धरना-प्रदर्शन और समर्थन कार्यक्रम आयोजित किए जाने के बाद शासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
मंगलवार को कई जिलों में युवाओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा प्रदर्शन किए गए। शासन स्तर पर पूरे घटनाक्रम की लगातार समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी स्थिति में प्रदेश की शांति व्यवस्था प्रभावित न हो। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है, जबकि स्थानीय खुफिया इकाइयों को भी सक्रिय कर दिया गया है। जिलों से लगातार फीडबैक लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे संदेशों की भी लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों के माध्यम से माहौल खराब करने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए साइबर और खुफिया तंत्र को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति या असामाजिक तत्व आंदोलन की आड़ में हिंसा फैलाने, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने या अफवाह फैलाने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शासन ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी संवेदनशील स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और प्रदेश में कानून-व्यवस्था हर हाल में बनाए रखी जाए। फिलहाल उत्तराखंड में स्थिति सामान्य बनी हुई है, हालांकि प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है।










