
सड़क पर भरे पानी में उतरा था करंट, मां की गोद में ही दम तोड़ गई दो साल की मासूम सृष्टि | ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, एसडीएम ने लापरवाही मिलने पर निलंबन की कही बात
ऋषिकेश। खदरी क्षेत्र में रविवार शाम बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। सड़क पर टूटकर गिरे बिजली के तार से पानी में उतरे करंट की चपेट में आने से 26 वर्षीय सुमन पत्नी हरपाल और उनकी दो वर्षीय बेटी सृष्टि की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त सुमन अपने बच्चों के साथ घर लौट रही थीं। सड़क पर पानी भरा था और इसी पानी में करंट प्रवाहित हो रहा था। जैसे ही सुमन का पैर पानी में पड़ा, वह करंट की चपेट में आकर गिर पड़ीं। उनकी गोद में मौजूद मासूम बेटी भी करंट की चपेट में आ गई।
हादसा इतना भयावह था कि दो वर्षीय सृष्टि ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। मां और बहन को अचानक गिरता देखकर उनका बेटा बुरी तरह घबरा गया और घर की ओर दौड़कर परिजनों को घटना की जानकारी दी। परिजन तत्काल मौके पर पहुंचे और दोनों को अस्पताल ले गए।
एम्स में डॉक्टरों ने मां-बेटी को मृत घोषित किया
परिजन सुमन और सृष्टि को उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। वहीं पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बिजली के पोल से तार टूटकर सड़क पर गिरा था और उसमें करंट प्रवाहित हो रहा था। सड़क पर पानी जमा होने के कारण करंट पानी में फैल गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते बिजली की आपूर्ति बंद कर दी जाती और टूटे तार को हटाया जाता तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।
एम्स में ग्रामीणों का हंगामा, कार्रवाई की मांग
मां-बेटी की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने एम्स ऋषिकेश पहुंचकर हंगामा किया और ऊर्जा निगम के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि सिर्फ मुआवजा देकर विभाग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
ऊर्जा निगम की ओर से अधिशासी अभियंता शक्ति सिंह ने पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की, लेकिन ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि घटना की वास्तविक जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य संजीव चौहान ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए डीएम को मौके पर बुलाने तथा संबंधित अधिकारियों, एमडी समेत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
एसडीएम बोलीं—जिम्मेदारी तय होगी, लापरवाही मिली तो निलंबन
ऋषिकेश की एसडीएम कुमकुम जोशी ने कहा कि विद्युत विभाग के कर्मचारियों को पहले भी सतर्क रहने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी बिजली व्यवस्था से संबंधित जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के स्तर से समय पर कार्रवाई नहीं की गई, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ने ग्रामीणों से पीड़ित परिवार को इस बेहद दुखद घड़ी में कुछ समय अकेला रहने देने की अपील भी की।
खदरी में पहले भी हो चुका है करंट हादसा
ग्रामीणों का कहना है कि खदरी क्षेत्र में बिजली की लाइन और तारों से जुड़े हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं। 21 जुलाई को लाइनमैन प्रदीप कश्यप की भी बिजली का फॉल्ट ठीक करने के दौरान करंट लगने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। विभागीय जांच के बाद एक अधिकारी समेत कुछ कर्मचारियों के तबादले भी किए गए थे।
अब महज कुछ समय बाद मां-बेटी की मौत की घटना ने एक बार फिर ऊर्जा निगम की कार्यशैली, लाइन व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल—आखिर सड़क पर कैसे पड़ा रहा जानलेवा तार?
इस हादसे ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बिजली का तार टूटकर सड़क पर कब गिरा? उसमें करंट क्यों प्रवाहित होता रहा? सड़क पर पानी में करंट फैलने की जानकारी विभाग को क्यों नहीं मिली? और सबसे अहम सवाल यह कि समय रहते बिजली आपूर्ति बंद क्यों नहीं की गई?
ग्रामीण अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मां-बेटी की मौत ने खदरी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।










