
हल्द्वानी। वनभूलपुरा में रेलवे भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार को पुनर्वास प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि परियोजना से जुड़ा गतिरोध अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास देने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
PMAY के तहत आवेदन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
पीठ ने निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों के लिए मौके पर विशेष पुनर्वास कैंप लगाए जाएं, ताकि पात्र लोग प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन कर सकें। अदालत ने कहा कि प्रत्येक परिवार की पात्रता का निर्धारण विधिवत आवेदन के बाद ही किया जाएगा।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रथम दृष्टया अधिकतर प्रभावित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) में आ सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
31 मार्च 2026 तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से 2019 की पुनर्वास नीति के तहत अब तक उठाए गए कदमों पर 31 मार्च 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने पूछा है कि नीति के अनुसार किन परिवारों को पुनर्वास का अधिकार मिलेगा और अब तक कितनी प्रगति हुई है।
पीठ ने कहा कि यदि आवेदन प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाती है तो यह सराहनीय होगा। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक सभी पात्र परिवार आवेदन नहीं कर लेते, तब तक कैंप जारी रखे जाएं।
जिला प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण की जिम्मेदारी
अदालत ने जिला कलेक्टर, राजस्व अधिकारियों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को वनभूलपुरा क्षेत्र में संयुक्त रूप से विशेष कैंप आयोजित करने का निर्देश दिया है। कैंप में परिवारों को आवेदन भरने में सहायता दी जाएगी और पात्रता का निर्धारण पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
रेलवे का पक्ष: 30.65 हेक्टेयर भूमि की जरूरत
सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से कहा गया कि लाइन के रियलाइन्मेंट और विस्तार परियोजना के लिए 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि जिन संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है, उनके प्रभावित परिवारों को छह माह तक 2000 रुपये प्रतिमाह देने का प्रस्ताव है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को छोटे भूखंडों का स्वामी चिन्हित किया गया है, उनकी भूमि लिए जाने पर विधिवत अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, अतिक्रमणकारियों को उसी भूमि पर पुनर्वास का दावा करने का अधिकार नहीं होगा, क्योंकि वह भूमि रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक है।
पहले भी मांगा था मास्टर प्लान
इससे पूर्व भी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से प्रभावित आबादी के पुनर्वास के लिए मास्टर प्लान मांगा था। करीब 50 हजार लोगों से जुड़े इस मामले में फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा रखी है।
मंगलवार के निर्देशों के बाद साफ है कि सुप्रीम कोर्ट अब पुनर्वास प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने और परियोजना से जुड़े विवाद को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाली सुनवाई में राज्य सरकार की रिपोर्ट और कैंपों की प्रगति पर अदालत की पैनी नजर रहेगी।











