
विकासनगर के सहसपुर थाना क्षेत्र में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है. यहां एक मां ने अपनी सात महीने की मासूम बेटी को पानी की टंकी में डुबोकर मौत के घाट उतार दिया. बताया जा रहा है कि बच्ची लंबे समय से बीमार थी, जिससे मां मानसिक रूप से अवसाद में थी.
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है।
मामला विकासनगर के सहसपुर थाना क्षेत्र के धर्मावाला का है. पुलिस के अनुसार, सादिया नामक महिला की सात माह की बेटी काफी दिनों से बीमार चल रही थी. लगातार इलाज और बच्ची की बिगड़ती हालत से सादिया मानसिक रूप से टूट गई थी. अवसाद में आकर उसने सोमवार को अपनी मासूम बेटी को घर में रखी पानी की टंकी में डुबो दिया. कुछ देर बाद जब परिजनों ने बच्ची को नहीं देखा तो उन्होंने तलाश शुरू की. इस दौरान टंकी में बच्ची का शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया।
पुलिस को घटना की जानकारी सादिया के पति ने दी
घटना के बाद सादिया के पति मुंतजिर ने पुलिस को सूचना दी. सहसपुर थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया. पति की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. थाना प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि आरोपी महिला को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि सादिया अपनी बेटी की बीमारी से बेहद परेशान थी. बच्ची का लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हुआ. इससे महिला मानसिक रूप से टूट गई और डिप्रेशन में आकर उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया. पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला का एक साढ़े तीन साल का बेटा भी है, जो घटना के समय घर में मौजूद था।
पुलिस ने बच्ची का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है. पड़ोसियों का कहना है कि सादिया काफी शांत स्वभाव की महिला थी, लेकिन बच्ची की बीमारी के कारण वह परेशान रहने लगी थी. किसी को भी अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी. पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपी महिला की मानसिक स्थिति का आकलन भी किया जा रहा है।
पुलिस ने बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट हो पाएगा. पुलिस मामले की जांच में जुटी है और महिला के मानसिक स्वास्थ्य की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति मानसिक अवसाद में हो या तनावग्रस्त हो तो वे परिवार के सदस्यों या काउंसलिंग केंद्रों से संपर्क करें. इस तरह के मामलों में समय रहते मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लेना जरूरी है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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