
लालकुआं (उत्तराखंड) तत्कालीन कांग्रेस सरकार (हरीश रावत) के प्रयासों के बाद लालकुआं की जनता को मालिकाना हक देने की कार्रवाई के संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया और तत्कालीन भाजपा सरकार में विधायक रहे नवीन दुम्का के द्वारा कुछ लोगों को मलिकाना हक के पट्टे भी दिए गए, इतना ही नहीं वर्षों से कांग्रेस पार्टी की सेवा करने का फायदा नहीं मिलने के बाद कुछ भाजपा में शामिल हुए और मालिकाना हक के शासनादेश का लाभ लेते हुए सरकारी भूमि के मालिक बन गए।
वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो शासन द्वारा जारी बंदोबस्ती के तहत वर्ष 2008 के कब्जेदारों के रूप में मालिकाना हक लेने के लाभ लेने की श्रेणी में तो आते हैं मगर उसके बाद भी अतिरिक्त जमीन कब्जा करने का उनका मोह भंग होने का नाम नहीं ले रहा है।
ऐसा ही एक मामला वार्ड नंबर एक में देखने को मिला है जिसमें कई लोग सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास कर रहे हैं या कर चुके हैं ? बावजूद इसके अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने वाली धामी सरकार इस ओर कोई ठोस कार्यवाही करती नहीं दिखाई दे रही है ?
जबकि चंद कदम की दूरी पर लालकुआं तहसील का मुख्यालय है जहां SDM से लेकर तहसीलदार सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहते हैं। ऐसे में वार्ड नंबर 1 में मालिकाना हक की श्रेणी का लाभ लेने या नियमानुसार, भविष्य में लाभ लेने की संभावना के बावजूद भी अवैध रूप से सरकारी जमीन को कब्जाने का प्रयास सम्भवतः दिखाई दे रहा है?










