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लालकुआँ/बिन्दुखत्ता:- सवा दो साल से अटकी अधिसूचना, बिंदुखत्ता में उबाल; 22वें दिन भी जारी रही घर-घर पदयात्रा…..

27 सितंबर को शहीद स्मारक पर जुटेंगे हजारों ग्रामीण, तहसील लालकुआं तक विशाल रैली की चेतावनी

बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। जिलास्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा राजस्व ग्राम के दावे को सर्वसम्मति से स्वीकृति दिए जाने के सवा दो साल से अधिक समय बाद भी अधिसूचना जारी नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर 15 अगस्त से शुरू हुई घर-घर पदयात्रा शनिवार को 22वें दिन भी जारी रही। पदयात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुषों ने भाग लेकर सरकार से जल्द अधिसूचना जारी करने की मांग उठाई।

शनिवार को पदयात्रा शांतिनगर नब्बे फीट चौराहे से शुरू होकर टूटी पुलिया बाजार, शांतिनगर गब्दा और ढाकानी रोड होते हुए प्राइमरी स्कूल के समीप स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर पहुंची। यहां रात्रि पड़ाव के दौरान भजन-कीर्तन के साथ वनाधिकार कानून को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री को फिर भेजा ज्ञापन, जनप्रतिनिधियों के पत्र किए संलग्न

अधिसूचना जारी करने में हो रही देरी के विरोध में पदयात्रा के बाद उपजिलाधिकारी लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक और ज्ञापन भेजा गया। इस बार ज्ञापन के साथ उन जनप्रतिनिधियों के पत्र भी संलग्न किए गए हैं, जिनमें जिला स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा राजस्व ग्राम का दावा स्वीकृत किए जाने के बाद राजस्व विभाग और मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर अधिसूचना जारी करने की मांग की गई है।

ज्ञापन के साथ सांसद अजय भट्ट, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी, वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी समेत कई पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों के पत्र संलग्न किए गए हैं।

‘अब राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपनी पार्टियों पर बनाएं दबाव’

पदयात्रा के दौरान पूर्व सैनिक दीपक नेगी ने राजनीतिक दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं से अपनी-अपनी पार्टियों के भीतर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग मजबूती से उठाने का आह्वान किया।

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उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल बारी-बारी से सत्ता में आते रहे और बिंदुखत्ता की जनता को राजस्व ग्राम के नाम पर लगातार आश्वासन मिलते रहे, लेकिन अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि 27 सितंबर की जनसभा के बाद तहसील लालकुआं तक प्रस्तावित विशाल रैली सरकार को स्पष्ट संदेश देगी कि बिंदुखत्ता की जनता अपने अधिकार के लिए अब निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है।

27 सितंबर की जनसभा पर टिकी नजरें

ग्रामीणों ने 27 सितंबर को बड़ी संख्या में शहीद स्मारक पहुंचकर जनसभा को सफल बनाने की अपील की। पदयात्रा से जुड़े लोगों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल मांग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अधिसूचना जारी होने तक चरणबद्ध तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।

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पदयात्रा में वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, बलवंत बिष्ट, नंदन बोरा, दीपक रौतेला, ममता बिष्ट, संध्या डालाकोटी, जीवन पांडे, दौलत सिंह कोरंगा, रमेश गोस्वामी, मनोज कोरंगा, कुंदन सिंह कोरंगा, कुंवर सिंह पवार, भूपेश जोशी, गोपाल सिंह मेहता, नारायण कोरंगा, तारादत्त जोशी, गजेंद्र सिंह, जीवन गुसाईं, वीरेंद्र कोरंगा, हरीश जोशी, बंशीधर जोशी, ईश्वर सिंह दानू, नरेश सूंठा, लीला चंदोला, भागीरथी कन्याल, खष्टी कन्याल, गुड्डी दानू, ममता रावत, रेखा कोरंगा, कविता पांडा, सपना कोरंगा, हंसी गड़िया, गीता कोरंगा, निर्मला भट्ट, गोविंद गिरी, कुंवर सिंह जदौड़ा, भूपाल सिंह रावत, दीवान सिंह, पुष्कर भंडारी, भवान सिंह कठायत, सुंदर सिंह धानिक सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

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