
हल्दूचौड़। नैनीताल जिले के हल्दूचौड़ स्थित सोयाबीन एवं वनस्पति इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स में पुराने गोदामों को तोड़े जाने के बाद कथित रूप से बड़ी मात्रा में उपखनिज निकलने और उसे परिसर से हटाए जाने का मामला अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पूरे प्रकरण की जांच जिला खनन अधिकारी से कराने की बात कही है।
जानकारी के अनुसार फैक्ट्री परिसर में पूर्व में कुछ पुराने गोदामों को ध्वस्त किया गया था। इसके बाद गोदामों के नीचे से उपखनिज निकलने और उसके कथित रूप से परिसर से बाहर अथवा अन्य स्थानों पर ले जाए जाने की चर्चाएं सामने आईं। मामला चर्चा में आने के बाद प्रशासन का ध्यान भी इस ओर गया।
एसडीएम के निरीक्षण के बाद भी जांच पर सवाल
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व उपजिलाधिकारी रेखा कोहली ने फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान मामले में आवश्यक कार्रवाई की बात सामने आई थी। इसके बाद जांच फैक्ट्री स्तर पर कराए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन अभी तक इस जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
अब जिलाधिकारी द्वारा जिला खनन अधिकारी से जांच कराए जाने की बात सामने आने के बाद प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है।
डीएम बोले—जिला खनन अधिकारी करेंगे पूरे मामले की जांच
मामले को लेकर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल से जानकारी लिए जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकरण की जांच जिला खनन अधिकारी के माध्यम से कराई जाएगी।
ऐसे में जांच के दौरान कई अहम बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है—फैक्ट्री परिसर में कितना उपखनिज मौजूद था, वह किस परिस्थिति में निकला, उसे हटाया गया या नहीं, यदि हटाया गया तो कहां ले जाया गया और इसके लिए नियमानुसार अनुमति अथवा प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
जांच के बीच गड्ढे भरने से उठे सवाल
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि यदि उपखनिज निकाले जाने की शिकायत सामने आ चुकी थी और प्रशासनिक स्तर पर निरीक्षण भी हो चुका था, तो जांच पूरी होने से पहले संबंधित स्थानों पर बने गड्ढों को भर दिए जाने की स्थिति क्यों सामने आई?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि इससे जांच के दौरान मौके की वास्तविक स्थिति का आकलन प्रभावित तो नहीं होगा। हालांकि, गड्ढे भरने की वास्तविक वजह और इसमें किसकी भूमिका रही, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
विद्युत पोल हटाने से जुड़े वीडियो की भी चर्चा
इसी मामले से जुड़े कुछ वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है, जिनमें परिसर से विद्युत पोल गायब होने अथवा हटाए जाने की स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह भी जांच का विषय है कि पोल कब, कैसे और किन परिस्थितियों में हटाए गए तथा क्या इसके लिए कोई अनुमति ली गई थी।
एफआईआर नहीं, कार्रवाई को लेकर भी उठ रहे सवाल
मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद फिलहाल पुलिस में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं।
यदि जांच में अवैध उत्खनन, नियमों के उल्लंघन, सरकारी संपत्ति को नुकसान या किसी अन्य अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारी तय करने और आगे की कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।
जांच रिपोर्ट से खुलेगा पूरा राज
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद अब जिला खनन अधिकारी की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि फैक्ट्री परिसर में उपखनिज को लेकर वास्तव में क्या स्थिति थी, उसे हटाया गया था या नहीं और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
वहीं, पूरे मामले में सोयाबीन एवं वनस्पति इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स प्रबंधन का पक्ष भी अहम है। प्रबंधन की ओर से यदि कोई दस्तावेज, अनुमति, रिकॉर्ड या स्पष्टीकरण सामने आता है तो उसे भी मामले की निष्पक्ष तस्वीर के लिए प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।










