
हल्द्वानी। राजपुरा स्थित नगर निगम गौशाला में गोवंश की हालत को लेकर सामने आए वायरल वीडियो के बाद अब गौशाला प्रबंधन ने सफाई देते हुए पूरे मामले को अलग रूप में पेश किए जाने का आरोप लगाया है। आश्रय समिति की संचालिका निकिता सुयाल ने प्रेस वार्ता कर कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो अधूरा है और इसके जरिए गौशाला एवं संस्था की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
निकिता सुयाल ने बताया कि कुछ दिन पहले गौशाला में कुछ गोवंश आपस में भिड़ गए थे, जिसके चलते कई गायें घायल हुईं। उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गौशाला की बाउंड्री के बाहर से किसी व्यक्ति द्वारा गोवंश को रोटी खिलाने का प्रयास किया गया, जिससे अचानक गायों में हलचल और भगदड़ की स्थिति बन गई। इसी दौरान आपसी टकराव में कुछ गोवंश घायल हो गए।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर केवल घटना का एक हिस्सा दिखाया गया, जबकि पूरे घटनाक्रम और उसके बाद किए गए उपचार व देखभाल की जानकारी सामने नहीं रखी गई।
“बिना जानकारी पहुंचकर किया गया हंगामा”
गौशाला संचालिका ने आरोप लगाया कि वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोग खुद को गोसेवक और गोरक्षक बताते हुए गौशाला पहुंचे और बिना वास्तविक स्थिति जाने हंगामा किया। उन्होंने कहा कि इनमें से कई लोगों को उन्होंने पहली बार गौशाला में देखा है और पहले कभी गोसेवा के लिए यहां आते नहीं देखा गया।
उन्होंने बताया कि आश्रय समिति द्वारा राजपुरा स्थित नगर निगम गौशाला के साथ ही रामपुर रोड स्थित गौशाला का भी नियमित संचालन किया जा रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने घायल गोवंश को भी मीडिया के सामने दिखाया और कहा कि सभी पशुओं का उपचार कराया जा रहा है तथा उनकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
नगर निगम ने किया गौशाला का निरीक्षण, चलाया सफाई अभियान
मामले के बीच नगर निगम हल्द्वानी की टीम भी गौशाला पहुंची और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। नगर निगम द्वारा जेसीबी मशीन लगाकर परिसर में जमा कीचड़ हटाने और सफाई व्यवस्था सुधारने का कार्य कराया गया।
निकिता सुयाल ने कहा कि बरसात के मौसम में गौशाला परिसर में कीचड़ की समस्या होना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए परिसर में पक्के खड़ंजे और बेहतर आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता है, जिसके लिए प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा की गई है।
गौशाला प्रबंधन ने कहा कि वायरल वीडियो के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय वास्तविक स्थिति और किए जा रहे प्रयासों को भी देखा जाना चाहिए।










