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लालकुआं की सियासत में बड़ा ट्विस्ट: शुभम अंडोला ने 2027 की दावेदारी से खींचे कदम, देखें सोशल मीडिया के माध्यम से कही बात…..

लालकुआं। विधानसभा क्षेत्र में 2027 के चुनाव को लेकर चर्चाओं के बीच समाजसेवी एवं युवा नेता शुभम अंडोला ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए फिलहाल सक्रिय राजनीति में आने से इनकार कर दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से भावुक संदेश जारी करते हुए अंडोला ने स्पष्ट किया कि वह 2027 में विधायक पद की दावेदारी पेश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि राजनीति से दूरी का निर्णय समाजसेवा से दूरी नहीं है और वह बिना किसी पद के पहले की तरह जनता के बीच सेवा करते रहेंगे।

शुभम अंडोला ने अपने संदेश में कहा कि पिछले कुछ दिनों में जिस तरह लोगों ने उनका नाम विधायक पद के लिए आगे बढ़ाया और उन्हें अपार प्रेम, समर्थन व आशीर्वाद दिया, वह उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने इस सम्मान को अपनी उपलब्धि नहीं बल्कि भगवान भोलेनाथ की कृपा, माता-पिता के आशीर्वाद और जनता के विश्वास का प्रसाद बताया।

‘जिन्होंने 10-15 साल संघर्ष किया, पहला सम्मान उन्हीं का’

अंडोला ने कहा कि उन्होंने कभी राजनीति में आने का सपना नहीं देखा और न ही किसी पद या टिकट की इच्छा लेकर समाजसेवा शुरू की थी। उनकी पहचान एक साधारण समाजसेवक की रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कई बड़े भाई पिछले 10 से 15 वर्षों से घर-घर जाकर जनता की सेवा और संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में उनका मन गवाही नहीं देता कि वह अचानक उनके सामने अपनी दावेदारी पेश करें।

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उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के विभिन्न राजनीतिक दलों से विधायक पद के दावेदारों से उनके आत्मीय और सम्मानजनक संबंध हैं। ऐसे कई लोग कुछ समय पहले तक उनके कार्यालय में आकर उनसे समर्थन मांग रहे थे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए कह रहे थे। अंडोला ने कहा कि ऐसे लोगों के सामने अचानक स्वयं दावेदारी पेश करना उन्हें उचित नहीं लगता।

‘500 से ज्यादा कॉल और संदेश आए, यह प्यार जीवनभर नहीं भूलूंगा’

शुभम अंडोला ने बताया कि पिछले करीब 10 दिनों में उन्हें 500 से अधिक फोन कॉल, संदेश और शुभकामनाएं मिलीं। खास बात यह रही कि केवल लालकुआं विधानसभा ही नहीं, बल्कि अन्य विधानसभा क्षेत्रों से भी लोगों ने फोन कर अपना समर्थन और स्नेह जताया।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी व्यक्ति के समर्थन में खुलकर सामने आना बड़ी बात है। बिना किसी पद की दावेदारी किए लोगों ने जिस तरह उनका समर्थन किया, वह उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। अंडोला ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह हमेशा अपने समर्थकों और क्षेत्र की जनता के साथ खड़े रहेंगे।

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परिवार की इच्छा के आगे राजनीति से बनाई दूरी

राजनीति में न आने के फैसले के पीछे उन्होंने परिवार को सबसे महत्वपूर्ण कारण बताया। अंडोला ने कहा कि वह अपने परिवार के अकेले बेटे हैं और माता-पिता तथा पत्नी भी इस समय उनके राजनीति में आने के पक्ष में नहीं हैं। इसके अलावा उनकी बहन की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है और परिवार की कई जिम्मेदारियां उन्हें निभानी हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीति में आने के बाद परिवार को पर्याप्त समय और साथ दे पाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में माता-पिता का आशीर्वाद, उनकी खुशी और परिवार का सम्मान उनके लिए किसी भी राजनीतिक पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

विधायक बनते तो सिर्फ एक रुपये वेतन लेने की कही थी बात

शुभम अंडोला ने अपने संदेश में उस संकल्प का भी जिक्र किया, जिसने पिछले दिनों काफी चर्चा बटोरी थी। उन्होंने कहा कि यदि वह राजनीति में आते और विधायक बनते तो भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर विधायक के वेतन में से केवल एक रुपया स्वीकार करने और शेष राशि जरूरतमंदों की सेवा में लगाने की उनकी भावना थी।

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हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत भावना थी और किसी अन्य विधायक या जनप्रतिनिधि से ऐसी अपेक्षा करना उचित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं और दावेदारों के संघर्ष व जनसेवा का सम्मान करने की बात कही।

‘राजनीति से दूरी, समाजसेवा से नहीं’

अंडोला ने साफ शब्दों में कहा कि उनका निर्णय राजनीति से दूरी बनाने का है, समाजसेवा से नहीं। उन्होंने कहा कि वह पहले भी बिना किसी पद के लोगों की सेवा करते रहे हैं, आज भी कर रहे हैं और जीवनभर करते रहेंगे।

उनका कहना है कि जनता ने उन्हें जो प्रेम, सम्मान और विश्वास दिया है, वही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह किसी राजनीतिक पद पर रहें या न रहें, जरूरत पड़ने पर हमेशा जनता के साथ खड़े रहेंगे।

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