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पूरे प्रदेश में सैन्य ड्रिल आज, लोगों को दी जाएगी हवाई हमले से बचने की ट्रेनिंग, देखें रिपोर्ट

पहलगाम में निर्दोष लोगों की धर्म देखकर हत्या करने वाले आतंकियों और उनके आकाओं को सबक सिखाने के पूरा भारत तैयार है। पाकिस्तान के साथ सीधे युद्ध की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा के लिए 244 जिलों में आज मॉक ड्रिल होगा।

यह मॉक ड्रिल कश्मीर से केरल और अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक पूरे देश में किया जाएगा।

मिलिट्री ऑपरेशन शुरू

मॉक ड्रिल से ही भारत की ओर से मिलिट्री ऑपरेशन शुरू हो चुका है। माक ड्रिल के दौरान गृहमंत्रालय द्वारा चिन्हित 244 जिलों में हवाई हमले को लेकर आम जनता को अलर्ट करने के लिए सायरन बजाकर उसकी जांच की जाएगी।

हवाई हमले के खतरे की जानकारी तत्काल जिला प्रशासन के पास पहुंच जाए इसके लिए एयर फोर्स के साथ हॉटलाइन या रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम की सक्रियता की जांच की जाएगी। इन जिलों में युद्ध की स्थिति पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम तैयार किया गया है, उसके सक्रिय होने की जांच की जाएगी।

छात्रों और बुजुर्गों को हवाई हमले से बचने की दी जाएगी ट्रेनिंग

इसके साथ ही सिविल डिफेंस से जुड़े वालेंटियर आम लोगों, खासकर छात्रों और बुजुर्गों के हवाई हमले की स्थिति में खुद बचाने और सुरक्षित स्थानों पर छुपने की ट्रेनिंग देंगे।

इसके अलावा इन जिलों घायलों को तत्काल निकालकर इलाज उपलब्ध कराने और आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की तैयारी की जांच की जाएगी। रात में हवाई हमले की सूचना मिलने पर जिले में तत्काल बिजली काटकर ब्लैक आउट करने की तैयारी भी जांच होगी।

नागरिकों की सुरक्षा के लिए मॉक ड्रिल को काफी अहम

गृहमंत्रालय के अनुसार सिविल डिफेंस के इस अभ्यास में सिविल डिफेंस वॉलिटियर्स के साथ-साथ एनसीसी व एनएसएस के कैडेट्स, नेहरू युवा केंद्र से जुड़े युवा और स्कूल व कॉलेज के छात्र हिस्सा लेंगे। 1971 के बाद कोई युद्ध नहीं होने के कारण नागरिकों की सुरक्षा के लिए मॉक ड्रिल को काफी अहम माना जा रहा है। 1999 में कारगिल का युद्ध जरूर हुआ था, लेकिन वह सीमित दायरे में था।

राज्यों को निर्देश भी दिये गए

नागरिकों के साथ-साथ अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सिविल डिफेंस को मजबूत करने की तैयारी 2010 में ही शुरू हो गई थी और सुरक्षा की दृष्टि से अहमियत रखने वाले 259 जिलों में सिविल डिफेंस सिस्टम खड़ा करने का फैसला किया गया था। अक्टूबर 2022 में सुरजकुंड में हुए चिंतन शिविर में सिविल डिफेंस को हमेशा तैयार रखने का फैसला लिया गया था और इसके लिए राज्यों को निर्देश भी दिये गए थे।

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