

‘विजन उत्तराखण्ड 2047’ पर विशेषज्ञों ने रखे सुझाव, पलायन रोकने से लेकर जल संरक्षण, रोजगार और हरित विकास तक बनी रणनीति
हल्द्वानी। उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ सतत विकास का मॉडल तैयार करने को लेकर ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के हल्द्वानी परिसर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार का शुक्रवार को सफल समापन हो गया। 8 और 9 अक्टूबर को आयोजित इस सेमिनार में शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, शोधार्थियों और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने ‘विजन उत्तराखण्ड 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास की संभावनाओं पर गहन मंथन किया।
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और पीडीपी विभाग की ओर से ‘आरोही’ संस्था के सहयोग से आयोजित सेमिनार का मुख्य विषय सतत अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन और समावेशी विकास के लिए युवा-नेतृत्व वाले नवाचार के माध्यम से उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का रूपांतरण रहा। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं की प्रतिभा, स्थानीय संसाधनों और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग कर राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं तथा पलायन की समस्या को कम किया जा सकता है।
आर्थिक प्रगति के साथ प्रकृति का संरक्षण भी जरूरी
उद्घाटन सत्र में ग्राफिक एरा हल्द्वानी के परिसर निदेशक डॉ. एम.सी. लोहानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य की आर्थिक प्रगति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है। सेमिनार की संयोजक प्रो. (डॉ.) बीना नारायण ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और विभिन्न सत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर शिक्षाविदों और शोधार्थियों के विचारों पर आधारित सेमिनार स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
मुख्य वक्ता एवं उत्तराखण्ड सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राज शेखर जोशी ने कहा कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक अवसंरचना के साथ सामाजिक अवसंरचना को भी समान प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने ग्रामीण विकास, कौशल सुधार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भविष्य की महत्वपूर्ण जरूरत बताया।
विशिष्ट अतिथि उत्तराखण्ड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) संजय कुमार ने राज्य में विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए स्थानीय युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर बल दिया।
पलायन रोकने और आय की असमानता दूर करने पर चर्चा
सेमिनार का प्रमुख आकर्षण ‘विजन उत्तराखण्ड 2047’ के अंतर्गत आयोजित पैनल चर्चा रही। इसमें राज्य में प्रति व्यक्ति आय की असमानता दूर करने, सतत विकास को बढ़ावा देने और युवाओं के पलायन पर प्रभावी अंकुश लगाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल कुमार जोशी के संचालन में हुई चर्चा में पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ने कम चर्चित पर्यटन स्थलों को विकसित करने और कौशल प्रमाणन पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो. पी.डी. पंत ने नदियों के संरक्षण में स्थानीय संस्कृति और संसाधनों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
वहीं, वाटरशेड प्रबंधन निदेशालय के डॉ. एस.के. उपाध्याय ने जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया। आईसीएआर-आईवीआरआई के डॉ. शेर सिंह ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन की जरूरत बताई, जबकि आरोही सोसाइटी के समिरन नारायण ने समावेशी और सुनियोजित पर्यटन को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
चार प्रमुख विषयों पर शोध-पत्रों की प्रस्तुति
हाइब्रिड मोड में आयोजित सेमिनार में देशभर के शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम को चार प्रमुख ट्रैक्स में विभाजित किया गया था, जिनमें सतत अवसंरचना एवं जलवायु परिवर्तन, उद्यमिता एवं युवा सशक्तिकरण, विजन उत्तराखण्ड 2047 एवं निरंतरता तथा ऑनलाइन ट्रैक शामिल रहे।
विभिन्न सत्रों में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, ग्रीन इंजीनियरिंग, ऊर्जा सुरक्षा, इको-टूरिज्म और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि विकास की योजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और युवाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना जरूरी है।
पोस्टर प्रतियोगिता में लक्ष्मी पंवार ने मारी बाजी
सेमिनार के दौरान आयोजित पोस्टर-मेकिंग प्रतियोगिता में ग्राफिक एरा हल्द्वानी के बीएजेएमसी की छात्रा लक्ष्मी पंवार ने प्रथम स्थान हासिल किया। एमआईईटी के शैलेंद्र कांडपाल दूसरे स्थान पर रहे, जबकि तीसरा स्थान संयुक्त रूप से एमआईईटी की वर्षा नैनवाल और जीईएचयू की शगुन जलहोत्रा को मिला। परिणीत वर्मा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सह-संयोजक डॉ. आनंद जोशी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। दो दिवसीय सेमिनार में सामने आए विचारों और सुझावों ने उत्तराखण्ड के सतत, समावेशी एवं युवा-केंद्रित विकास की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाया।











