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UGC के नए रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया ब्रेक, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण….

‘दुरुपयोग का खतरा’: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए इक्विटी नियमों पर लगाई रोक, केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली— सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि नियमों की भाषा पहली नजर में स्पष्ट नहीं है और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं, जिससे गलत व्याख्या और अनुचित इस्तेमाल का रास्ता खुल सकता है। अदालत ने एहतियातन इन नियमों के अमल पर रोक लगाते हुए कहा कि फिलहाल 2012 के पूर्ववर्ती एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियम ही लागू रहेंगे, ताकि शिकायत निवारण की व्यवस्था बाधित न हो।

इन नियमों को कई याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नई व्यवस्था मनमानी है, संविधान में निहित समानता के सिद्धांत के विपरीत है और UGC Act, 1956 की सीमाओं से आगे जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल केवल नियमों की कानूनी वैधता और संवैधानिकता की जांच कर रही है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने नियमों में प्रयुक्त कुछ शब्दों और परिभाषाओं पर भी सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने संकेत दिया कि सामाजिक समरसता और संतुलन बनाए रखने के लिए नियमों का ढांचा साफ और संतुलित होना जरूरी है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या पहले से मौजूद प्रावधानों के रहते नए ढांचे की आवश्यकता और औचित्य पर्याप्त रूप से स्पष्ट किया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक 2026 के नए नियम लागू नहीं होंगे और विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में 2012 की व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी। यह फैसला फिलहाल उन याचिकाकर्ताओं के लिए राहत माना जा रहा है जिन्होंने इन नियमों के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी।

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