
लालकुआं/हल्द्वानी। काठगोदाम से लेकर शांतिपुरी तक गौला नदी के तटीय क्षेत्रों में हो रहे भीषण भू-कटाव को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेमवती नंदन दुर्गापाल ने प्रभावित ग्राम सभाओं की जनता की ओर से सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि नदी किनारे बसे लगभग 18 गांव वर्षों से भू-कटाव की गंभीर समस्या झेल रहे हैं। हर वर्ष बरसात में कृषि भूमि, सड़कें, मकान और अन्य संपत्तियां नदी में समा जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया।
दुर्गापाल ने कहा कि सरकार लगातार विकास और तट सुरक्षा के दावे करती रही है, लेकिन धरातल पर हालात इसके विपरीत हैं। उन्होंने सरकार के सामने पांच प्रमुख सवाल सार्वजनिक करते हुए जवाब मांगा।
हेमवती नंदन दुर्गापाल के सरकार से पांच सवाल
🔹 1. काठगोदाम से शांतिपुरी तक गौला नदी के भू-कटाव को रोकने के लिए सरकार की स्थायी योजना क्या है? यदि योजना है तो उसे अब तक लागू क्यों नहीं किया गया?
🔹 2. पिछले 9 वर्षों में गौला नदी पर चैनलाइजेशन, तट सुरक्षा, बोल्डर पिचिंग और अन्य कार्यों पर कितनी धनराशि स्वीकृत हुई और कितनी खर्च की गई? सरकार वर्षवार विवरण, कार्यदायी संस्था के नाम और गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
🔹 3. इन कार्यों से अब तक कितने गांवों में भू-कटाव स्थायी रूप से रुका और कितनी कृषि भूमि सुरक्षित हुई?
🔹 4. यदि पिछले 9 वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, तो आज भी गौला नदी किनारे बसे लगभग 18 गांव भू-कटाव से प्रभावित क्यों हैं?
🔹 5. क्या सरकार इस पूरे मामले का किसी स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट जनता के सामने रखेगी?
इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहन कुड़ाई ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गौला नदी से प्रभावित लाखों ग्रामीणों की यह पूरी तरह जायज मांग है कि पिछले नौ वर्षों में भू-कटाव रोकने के नाम पर हुए खर्च का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बजट खर्च करने की जानकारी न दे, बल्कि यह भी बताए कि उन कार्यों का धरातल पर क्या परिणाम निकला और कितने गांवों तथा किसानों को वास्तविक राहत मिली।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गौला नदी का भू-कटाव हजारों परिवारों की आजीविका, खेती और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार को विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर वैज्ञानिक एवं स्थायी समाधान की समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती और पिछले वर्षों के खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं करती, तो प्रभावित ग्रामीणों को साथ लेकर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।










