
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में लंबे समय से राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हजारों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। कैबिनेट ने देहरादून के बापूग्राम, 54 बग्गा तथा नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। साथ ही मुख्य सचिव को इन क्षेत्रों को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
कैबिनेट के इस निर्णय को विशेष रूप से बिंदुखत्ता क्षेत्र के हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों से राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलने के कारण यहां के लोगों को भूमि संबंधी अधिकार, भवन निर्माण, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा आधारभूत सुविधाओं के विकास में कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार के निर्णय के अनुसार गठित उच्चस्तरीय समिति संबंधित क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति, कानूनी प्रावधानों, प्रशासनिक पहलुओं और अन्य आवश्यक बिंदुओं का विस्तृत अध्ययन करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य सचिव राजस्व ग्राम गठन का अंतिम प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेंगे, जिसके बाद आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बिंदुखत्ता उत्तराखंड की सबसे बड़ी वन भूमि पर बसी आबादियों में शामिल है, जहां वर्षों से हजारों परिवार निवास कर रहे हैं। लंबे समय से क्षेत्र के लोग राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की मांग करते आ रहे हैं। इस मुद्दे को विभिन्न जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा समय-समय पर सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाता रहा है।
यदि इन क्षेत्रों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलता है तो भूमि संबंधी अधिकारों को स्पष्ट करने के साथ-साथ सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि समिति की रिपोर्ट और मुख्य सचिव द्वारा तैयार प्रस्ताव के आधार पर आगे की सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। कैबिनेट के इस फैसले से विशेष रूप से बिंदुखत्ता, बापूग्राम और 54 बग्गा के हजारों परिवारों में वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की नई उम्मीद जगी है।










