
रामनगर। जीएसटी की समाधान योजना के अंतर्गत पंजीकृत छोटे व्यापारियों की समस्याओं को लेकर रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने राज्य कर विभाग के संयुक्त आयुक्त रोशन लाल को ज्ञापन सौंपकर व्यापारियों पर की जा रही पेनल्टी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता पूरन चन्द्र पाण्डे ने बताया कि समाधान योजना के अंतर्गत आने वाले व्यापारी न तो खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेते हैं और न ही बिक्री पर ग्राहकों से कर वसूलते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कई व्यापारियों ने राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं, विशेष रूप से मनरेगा के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर निर्माण सामग्री की आपूर्ति की थी, लेकिन उनका भुगतान पिछले दो से तीन वर्षों से लंबित पड़ा हुआ है।
वहीं एसोसिएशन के उपसचिव अधिवक्ता मनु अग्रवाल ने बताया कि जिन व्यापारियों को आंशिक भुगतान प्राप्त हुआ है, उन्होंने उस पर देय कर का भुगतान भी कर दिया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में व्यापारियों का लाखों रुपये का भुगतान अभी भी सरकारी विभागों पर बकाया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा ब्लॉक कार्यालयों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संबंधित व्यापारियों को कर निर्धारण एवं पेनल्टी के नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे व्यापारी वर्ग में भारी चिंता और असंतोष व्याप्त है।
एसोसिएशन का कहना है कि कई व्यापारियों ने अधिवक्ताओं की सलाह पर कर एवं ब्याज का भुगतान भी कर दिया है, जबकि उन्हें अब तक सरकारी विभागों से उनका बकाया भुगतान नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में पेनल्टी की कार्रवाई छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है और उनकी वित्तीय स्थिति को और अधिक कमजोर कर रही है।
रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने राज्य सरकार और कर विभाग से मांग की है कि समाधान योजना के अंतर्गत आने वाले छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पेनल्टी संबंधी सभी कार्यवाहियों को समाप्त किया जाए। साथ ही सरकार द्वारा समय-समय पर लागू की जाने वाली ब्याज एवं पेनल्टी माफी योजनाओं का लाभ भी इन व्यापारियों को दिया जाए।
ज्ञापन के माध्यम से एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि व्यापारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो छोटे व्यापारियों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, जिसका असर स्थानीय व्यापार और रोजगार पर भी पड़ सकता है। टैक्स बार एसोसिएशन ने सरकार से संवेदनशीलता के साथ मामले पर विचार करते हुए व्यापारियों को राहत प्रदान करने की मांग की है।










